Translation from English to Tamil and/or Hindi

Status: In progress
Time needed: 
Half a day
Step: 
1

We have some great learning materials that need to be translated from English to Tamil and/or Hindi in order to be easily accessible to the students in the Evening School.
The document is a fairytale, teaching basic money management skills.

If you can help -please let us know- either here or at tanja (@) volunteer (dot) nabuur (dot) org.

Task deadline: May 6th

*****UPDATE*****
Tamil translation was completed by Narayan, Somdutta and Sarita offered to help polish the automatic translation to Hindi.

The task deadline is extended by May 15th, Somdutta is working on the Hindi translation, but it is taking longer because of the used software.

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Hi Muna,

Narayan will join the chat today- so we can discuss adding more pictures/drawings to the story :)
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-Tanja

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Hi Somdutta and Sarita,

Any progress on the Hindi translation? I found this tool online- would you give it a try?
http://www.quillpad.in/hindi/

Best regards,
-Tanja

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Hey Tanja,

did you able to convert to tamil too? if yes, where is it? not able to find the same

Jegan

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Jegan,

The Tamil translation was emailed to you on April 14, it is also attached to Narayan's post from the same date and it is in the resources tab.

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-Tanja

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The Hindi translation is almost complete. I hope to be able to put it up in a day or two. :)

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एक घड़ा सोने का

एक समय की बात है, 'सन सन' नाम के एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे, सिम्बा बिल्ली और मूसो चूहा. वे एक सेब के खेत मे रहते थे और बाज़ार में अपने सेब बेचकर पैसा कमाते थे. इन वर्षों में, सिम्बा और मूसो सेब बेचकर अधिक पैसा कमाने के तरीके खोज रहे थे. वे गांव के दूसरे छोर तक जाकर लेयलन नाम के एक और किसान से भी मिले थे जो सेब की खेती और बिक्री से बहुत अधिक पैसे कमाता था . वे सोचते थे कि लेयलन उनसे अलग उनसे बेहतर ऐसा क्या करता है जो उसके सेब सिम्बा और मूसो के सेब के समान होने के बावजूद लेयलन उन्हे बेचकर इतना पैसा कमा चुका था कि उसने सोने का एक घड़ा खरीद लिया.

एक तूफानी शाम, सिम्बा और मूसो अपने सेब बेचकर बाज़ार से वापस घर जा रहे थे. वे दोनो उस दिन की बिक्री से निराश थे, उन्होने मुश्किल से बस थोड़े से पैसा कमाए थे. सिम्बा ने मूसो की तरफ देखा और कहा,
"एक दिन मूसो, मैं भी सोने का एक घड़ा खरीदूगां."
मूसो ने उत्तर दिया, "मैं भी सिम्बा! मैं भी!"

अगली सुबह, जब वे नीद से उठे, उन्होने देखा की तूफान के कारण सारे पके हुए सेब बरबाद हो गये थे. इसका मतलब था कि उनके पास बाकी मौसम के दौरान बेचने के लिए कम ही सेब बाकी रह गये थे. सिम्बा और मूसो दोनो को समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे. न ही लेयलन और न ही अन्य पड़ोसी किसानों को कुछ सूझ रहा था जो खुद भी तूफान मे अपने सेब खो चुके थे. सारे किसान इतने दुखी थे कि जो थोड़े से सेब अब तक पेड़ों पर बाकी थे, उन्होने उन्हे वही छोड़ दिया. सिम्बा और मूसो भी निराशा मे यही करने वाले थे, लेकिन मूसो सोच मे था कि शायद इस बुरी स्थिति को सवारने के लिए वे कुछ कर सके.

फिर, अचानक से , मूसो को एक नयी तरकीब सूझी! उसने सिम्बा और कुछ अन्य किसानों को सुझाव दिया कि वे अपने-अपने खेतों से सारे बचे हुए सेबों को इकट्ठा करे ताकि वे बाज़ार मे अच्छे सेबों को साधारण या सामान्य मूल्य पर और बाकी सेबों को "डिस्काउंट" मूल्य पर बेच सकें. इस तरह, वे निशचय ही "प्रॉफिट" या लाभ कर सकेंगे और आपस में लाभ बाँट भी पाएँगे. किसी को मूसो की तरकीब समझ मे नहीं आई, इसलिये अन्य किसानों ने उसके इस योजना का हिस्सा नहीं बनने का निर्णय लिया और वहाँ से चले गये.

लेकिन सिम्बा को अपने दोस्त पर भरोसा था और उसे मूसो की तरकीब पसंद आई. पर सिम्बा को "डिस्काउंट" या "छूट" और "प्रॉफिट" या "लाभ" इन शब्दों के मतलब पता नहीं थे. तो उसने मूसो से पूछा.

मूसो का जवाब यूँ था, "डिस्काउंट का मतलब किसी चीज़ को कम कीमत पर बेचना. "
उदाहरण के लिए, यदि एक बेहतरीन सेब की कीमत 10 रुपए हो तो उससे कम परिपुष्ट एक अन्य सेब 5 रुपए के “डिस्काउंट” या छूट के साथ बेचा जा सकता है .

"प्रॉफिट या लाभ उस राशि को कहते है जो बिक्री से प्राप्त पैसे से लागत राशि या सेब की खेती मे खर्च हुए पैसे को घटाने पर मिले."
उदाहरण के लिए, यदि मूसो को बाज़ार में सेब की बिक्री से 150 रुपये मिले हो, और सेब की खेती मे उसने 100 रुपये खर्च किए हो, तो उसे 50 रुपये की प्रॉफिट या लाभ प्राप्त हुई. बिक्री से प्राप्त 150 रुपये से खर्च हुए 100 रुपये को घटाने पर मूसो को 50 रुपये की यह राशी प्राप्त हुई.

अब जब कि सिम्बा को "डिसकाउंट" और "प्रॉफिट" के मतलब समझ आ गये थे, वह खुशी से मूसो की योजना मे शामिल होने को राज़ी हो गया.
सिम्बा और मूसो ने बिना समय बर्बाद किए सारे सेब इकट्ठा कर लिए - बेहतरीन सेब और नष्ट सेब भी. फिर वे सेबों को बोरियों में ले कर बाज़ार मे बेचने के लिए गये; वहाँ उन्होने अच्छे सेबों को 10 रुपये प्रति सेब और नष्ट सेबों को 5 रुपये प्रति सेब के भाव से बेचा. अगले सप्ताहों में सिर्फ़ सिम्बा और मूसो ने बाज़ार मे सेब बेचा. सभी उनके सेब खरीदने को बेचैन रहते थे क्योंकि बाज़ार मे सेब बेचने वाला और कोई नही था. जैसे जैसे अधिक से अधिक लोग उनके सेब खरीदने लगे, सिम्बा और मूसो भी अच्छे सेबों की कीमत 10 रुपये से 12 रुपये प्रति सेब तक बढ़ाने में सक्षम हो गये.

उन्होंने नष्ट सेबों की भी कीमत 5 रुपए से 7 रुपए प्रति सेब तक बिना ग्रामीणों से कोई शिकायत के ही बढ़ाने मे सक्षम हो गये. ग्रामीणों को अपने परिवारों के लिए खाना और मिठाइयाँ बनाने के लिए सेबों की जरूरत थी, और बाज़ार मे सभी के लिए काफी सेब नहीं थे, इसीलिए वे सिम्बा और मूसो से किसी भी कीमत पर सेब खरीदने के लिए राज़ी हो गये. अगले मौसम तक सिम्बा और मूसो ने सेब बेचकर इतने पैसे कमा लिए कि हर एक ने 250 रुपए का मुनाफा या 'प्रॉफिट' बना लिया !

वे दोनों बहुत उत्तेजित थे क्योंकि उन्हे पता था कि अब सिर्फ कुछ ही समय कि बात है जब वे स्वयं सोने के घड़े खरीद सकेंगे.

अब जब कि सिम्बा और मूसो प्रत्येक के पास 250 रुपए थे, वे सोच मे पड़ गये कि अपने नए पैसे के साथ क्या करें. उन्होने तय किया कि अगले मौसम मे सेब उगाने के लिए वे 100-100 रुपये का प्रयोग करेंगे , ताकि वे उन सेबों को बेच कर भी “प्रॉफिट” कमा सकें. उन्होने 50-50 रुपये अपने घर और परिवार और जरूरत की चीजों पर खर्च करने का भी फ़ैसला किया. अब उन दोनों के पास 100-100 रुपये बाकी थे. “इस पैसे का क्या करें?” सिम्बा ने पूछा.

क्योंकि मूसो और सिम्बा के पास कृषि पर खर्च करने और अपने परिवारों की देखभाल करने के लिए अब पर्याप्त धन था, उन्होंने अपने-अपने 100 रुपये लेयलन के खेत मे निवेश या "इनवेस्ट" करने का फैसला किया.

"इनवेस्ट" करने का मतलब है अपने पैसे ऐसे कहीं लगाना जहाँ उस पैसे की वृद्धि होने की सबसे अधिक संभावना हो. तो अपने- अपने 100 रुपये "इनवेस्ट" या निवेश करने के लिए, उन्होंने लेयलन को ऋण या "क्रेडिट" पर अपने पैसे दे दिये. जब कोई किसी और व्यक्ति को पैसे उधार दे और बाद मे अपने पैसे ब्याज या "इंटरेस्ट" के साथ वापस ले, तो उसे "क्रेडिट" कहते है, ब्याज या "इंटरेस्ट" उस अत्यधिक पैसे की राशि को कहते है जो लेयलन दोनो दोस्तो के पैसे इस्तेमाल करने के बदले उन्हें अदा करेगा, या वह राशि जो दोनो दोस्त अपने पैसे उधार देने के लिए लेयलन से कमाएँगे. यह राशि उधार दिए हुए पैसे के कुछ प्रतिशत के बराबर है जो मूसो और सिम्बा को एक निश्चित समय के भीतर, सामान्य रूप से 1 वर्ष के भीतर, भुगतान किया जाना चाहिए.

मूसो और सिम्बा जानते थे कि लेयलन हमेशा अपने सेब बेचने से लाभ कमाता था. हालाकि तूफान की वजह से इस मौसम में वह लाभ नही कर पाया, उन्हें यकीन था कि लेयलन जल्द ही लाभ करने मे सक्षम होगा और उनके पैसे ब्याज समेत उन्हें वापस कर सकेगा.

लेयलन को अपने पैसे देने के पहले मूसो और सिम्बा ने उससे "कांट्रॅक्ट" नाम के एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर लिए. "कांट्रॅक्ट" उस दस्तावेज को कहते है जो उधार दिए गये पैसे का विवरण करता हो. यह दस्तावेज उधार लिए धन की राशि, तारीख, और "इंटरेस्ट" या ब्याज, इत्यादि का विवरण भी करता है. लेयलन के "कांट्रॅक्ट" के अनुसार उसे उधार दिए गये प्रत्येक 100 रुपये पर लेयलन को हर साल उस राशि के 5% मूसो और सिम्बा को भुगतान करने है और साथ ही 5 साल में उन्हे पूरे 100-100 रुपये भी वापस भुगतान करने है. यानी लेयलन को 5 सालों तक मूसो और सिम्बा के प्रति हर साल 5-5 रुपये प्रत्येक अदा करने है. यह 5 रुपये उन दोनो से उधार लिए हुए 100 रुपये के 5% के बराबर है. 5 सालों में, लेयलन ने मूसो और सिम्बा मे प्रत्येक को "इंटरेस्ट" के तौर पर 25 रुपए भुगतान कर दिया होगा. इन 5 सालों के अंत में लेयलन को प्रत्येक के 100 रुपये भी वापस कर देने होंगे.
5 साल के बाद, मूसो और सिम्बा को लेयलन से अपने- अपने 100 रुपए वापस मिल गये, उन्होने लेयलन से कमाए 5 रुपये प्रति साल "इंटरेस्ट" के पैसे भी जमा कर लिया. कुल मिलकर दोनो मे से प्रत्येक के पास अब लेयलन से "इंटरेस्ट" मे मिले हुए 25 रुपये थे.

लेयलन के खेत मे "इनवेस्ट" करने के फलस्वरूप 5 साल मे मूसो और सिम्बा प्रत्येक के 100 रुपये 125 रुपये मे बदल गये. अगर उन्होने अपने पैसे को निवेश या "इनवेस्ट" करे बिना घर में रख दिया होता, तो वह 100 रुपये 5 साल के बाद भी 100 रुपये ही रह जाता . परंतु 100 रुपये का मोल / मूल्य 5 सालों मे कम हो जाएगा क्योंकि इस समय के दौरान चीज़ों की कीमत बढ़ जाएगी. तो सिम्बा और मूसो ने लेयलन के खेत में अपने पैसे का निवेश या "इनवेस्ट" करने मे काफ़ी अक्लमंदी दिखाई. उन्होने अन्य पड़ोसी खेतों में अपने पैसे का निवेश या "इनवेस्ट" करना जारी रखा. लंबे समय बीतने के पूर्व ही वे अपने खुद का सोने का घड़ा खरीदने मे सक्षम हो गये! यहां तक कि उनका घड़ा लेयलन के घड़े से भी बड़ा था.

मूसो और सिम्बा को अपने सपनों का सोने का घड़ा आख़िर मिल ही गया. जहाँ तक लेयलन का सवाल है, वह भी निराश नही हुया. उसने सेब बेच कर 5 साल मे 250 रुपये कमा लिए. पर क्योंकि उसने मूसो और सिम्बा प्रत्येक से 100 रुपये उधार लिए थे और उसे प्रत्येक के प्रति 25 रुपए ब्याज या "इंटरेस्ट" चुकता करना था, वह कोई लाभ या "प्रॉफिट" नहीं कर पाया. पर लेयलन के पैसे बर्बाद भी नही हुए, उसे बराबरी का फायेदा हुआ. यानी सेब बेचने से कमाए हुए पैसे खेती मे खर्च किए गये पैसे के बराबर थे. इसलिए, लेयलन को न ही लाभ और न ही नुकसान हुया. मूसो और सिम्बा अपने गाँव के अन्य किसानों को उनके पैसों के बेहतर प्रबंधन के बारे में सिखाने के लिए चल दिए. इस तरह 'सन-सन' नाम का यह गाँव सारे गाँवों मे सबसे धनी गाँव होने को चला.

समाप्त

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Dear All,

One of our HELP's Volunteer's friend from Bangalore is releasing Album in which he wish to promote HELP and by which some part of the earning should be given to our organization for our Evening School activities.

We would love to get your ideas & support to promote this Album by which to get support. Kindly red below. You can also reach me in jegan@helptrust.org for further info.

Tanja, as we dont have any facilitator, can you do co-ordination in this? or any other volunteers who are intersted can also contact.

Below is the discussion going on with them.

mukul gupta Mon, May 18, 2009 at 8:57 AM
To: Arundhati , Jegan bose , karthikchandan.p@gmail.com
Hi Folks,

Based on the discussion with Karthik following things have been proposed :

1. 50% of the earnings through sales of CDs by HELP will go to the trust with which Karthik is associated with. Rest 50% will go to HELP.
2. 20% of the earnings through sales of CDs by karthik would go to HELP.

3. HELP Logo will appear on the album cover.

4. Karthik would create a different merchant account that would receive earnings only through HELP.

5. We should encourage people to buy CDs online which means our target audience should be people who uses internet frequently.

6. Money collected through cash or cheques should be deposited in an account created by Karthik or me.

7. Flyers for promotion of the album should have the album cover and the HELP Logo.

8. A link to karthik`s website should be there on HELP enabling people to download songs from his site.

If any concerns or any more suggestions please reply to all to this mail.

Thanks,

Mukul Gupta

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Good Morning!

I tried reaching you on your cellphone, it was not available. Please share a number where I could reach you.

And have a look at the below mail.

Thank you,

Mukul Gupta

---------- Forwarded message ----------
From: mukul gupta
Date: Tue, May 12, 2009 at 6:26 PM
Subject: Fwd: My first music album "Maa Aur Doori" on "Mother's day" for a Cause...
To: Jegan

Hi Jegan,

This is in reference to a music album of a friend which is coming out soon. The proceeds from which he wishes to donate to some charitable organization. We came up with the idea, if helptrust and the artist could endorse each other. By this I mean :-

a percentage of the proceeds helptrust gets
helptrust is endorsed on the music album cover
helptrust could seek volunteers help in popularizing the album, which is definately for a very noble cause
we could even feature the album on our website
These are few ideas that striked... many more to come. Please let me know if you feel it is prudent.

Waiting to hear back from you,

Mukul
---------- Forwarded message ----------
From: Arundhati
Date: Tue, May 12, 2009 at 11:56 AM
Subject: Re: My first music album "Maa Aur Doori" on "Mother's day" for a Cause...
To: Karthik Chandan
Cc: Mukul

Hi Karthik,

Sorry for the delayed response. Here is the organization I was talking
about yesterday.

http://helptrust.org/

Please have a look.

Thanks,

Arundhati

On Mon, May 11, 2009 at 8:26 AM, Karthik Chandan
wrote:
> Hi Arundhati,
>
> Hope this email finds you in great spirits. I wish you and your family A
> Very Happy Mother’s Day.
>
> As one my song says, “Shayad yehi hai Maa, mera pehla kadam”! On this very
> special day, I hereby announce my first step into helping poor people for
> their education and health. My Music Album “Maa Aur Doori” is all about
> relationship between the Mother and her child. To know more about the album
> and the cause behind it click the link given below (or click on the images
> below):
>
> http://www.karthikchandan.com/mad/index.html
>
>
>
> Hope to hear from you soon with comments, suggestions & ideas. For any other
> information regarding this project, please feel free to contact me by email
> or phone. Feel free to share this email with family and friends.
>
> Thanks & Regards,
>
> Karthik Chandan

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Local Representative

Hi Somdutta,

Great to read this story in Hindi.Its really helpful to know better who know Hindi.I like to download this story for vadgam children's in Hindi,so requesting you to pl.email me Hindi Font which used in this page.I like to store and read this story in my pc so I need to install Hindi Font which used in this page.

my email id is nitin2550@yahoo.co.in

I also like to invite you to visit our website www.vadgam.ning.com

Thanking you,

Regards,

Nitin

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